दीपावली: रोशनी का त्योहार

दीपावली, जिसे दिवाली भी कहा जाता है, भारत के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जिसे देश भर में बहुत हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार, जो आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर में पड़ता है, अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह एक पांच-दिवसीय उत्सव है जो परिवारों और समुदायों को रोशनी, रंगों और उत्सवों के जीवंत प्रदर्शन में एक साथ लाता है।


**ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व**

दीपावली की उत्पत्ति विभिन्न ऐतिहासिक और पौराणिक घटनाओं से जुड़ी है। हिंदू परंपरा में, दीपावली भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने और रावण पर उनकी विजय का स्मरण करती है। अयोध्या के लोगों ने उनके स्वागत के लिए तेल के दीपक जलाए थे, जो अंधकार को दूर करने और प्रकाश का स्वागत करने का प्रतीक है। इसके अलावा, दीपावली देवी लक्ष्मी, धन और समृद्धि की देवी, से जुड़ी है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे घरों में आती हैं और उन्हें समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

**दीपावली के पांच दिन**

1. **धनतेरस**: त्योहार धनतेरस से शुरू होता है, जो धन और समृद्धि को समर्पित दिन है। लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और धातु और बर्तनों की खरीदारी करते हैं, जो अच्छे भाग्य का संकेत है।

2. **नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)**: दूसरा दिन, जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है, भगवान कृष्ण की नरकासुर पर विजय का स्मरण करता है। यह दिन सुबह की धार्मिक क्रियाओं और दीपक जलाने के साथ मनाया जाता है।

3. **लक्ष्मी पूजा (दीपावली)**: दीपावली का मुख्य दिन बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। घरों को रंगोली (रंगीन पैटर्न) से सजाया जाता है, और देवी लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए तेल के दीपक या दीया जलाए जाते हैं। परिवार लक्ष्मी पूजा के लिए एकत्रित होते हैं, इसके बाद दावत और उपहार और मिठाईयों का आदान-प्रदान होता है। रात का आकाश पटाखों से रोशन होता है, जो उत्सव की भावना को और बढ़ाता है।

4. **गोवर्धन पूजा**: चौथे दिन, जिसे गोवर्धन पूजा कहा जाता है, भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने का उत्सव मनाया जाता है। लोग देवता को विभिन्न प्रकार के भोजन का भोग लगाते हैं।

5. **भाई दूज**: त्योहार भाई दूज के साथ समाप्त होता है, जो भाइयों और बहनों के बंधन को समर्पित दिन है। बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और समृद्धि की प्रार्थना करती हैं, और भाई उपहार देकर अपना प्यार और सुरक्षा जताते हैं।

**सांस्कृतिक प्रथाएँ और परंपराएँ**

दीपावली केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक त्योहार भी है, जिसे विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग मनाते हैं। यह घरों की सफाई और सजावट, त्यौहारी भोजन की तैयारी, और नए कपड़े पहनने का समय है। मिठाईयों और उपहारों का आदान-प्रदान सामाजिक संबंधों को मजबूत करता है और एकता और सद्भावना की भावना को बढ़ावा देता है।

**पर्यावरणीय जागरूकता**

हाल के वर्षों में, दीपावली के उत्सवों के पर्यावरणीय प्रभाव, विशेष रूप से पटाखों के उपयोग के संबंध में, जागरूकता बढ़ी है। कई लोग अब पारंपरिक तेल के दीपक और एलईडी लाइट्स का उपयोग करके प्रदूषण को कम करने और टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन पटाखों और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपना रहे हैं।

**निष्कर्ष**

दीपावली एक ऐसा त्योहार है जो धार्मिक सीमाओं से परे जाकर लोगों को एक साथ लाता है और प्रेम, प्रकाश और समृद्धि का उत्सव मनाता है। यह अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है, भविष्य के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने और अपने प्रियजनों के साथ खुशी बाँटने का समय है। जब हम अपने दीपक जलाते हैं और अपने घरों को दीपावली की गर्माहट से भरते हैं, तो आइए हम अपने दिलों और समुदायों में भी दया, करुणा और एकता का प्रकाश फैलाएँ।

त्योहार की रोशनी आप सभी के जीवन में खुशियाँ, समृद्धि और शांति लाए!